श्री दुर्गा जी की आरती
Shri Durga Ji Ki Aarti · Shivanand Swami
‘जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी’ — माँ दुर्गा की सबसे प्रचलित आरती, जो नवरात्रि, माता की चौकी और हर देवी पूजा में गाई जाती है। नीचे पूरी आरती बड़े, साफ़ अक्षरों में है; हर पद के बाद ‘ॐ जय अम्बे गौरी’ दोहराया गया है, जैसे यह गाई जाती है।
आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
- 1
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 2
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 3
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 4
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 5
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 6
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 7
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।आगम-निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 8
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 9
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 10
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 11
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
- 12
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
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जय अम्बे गौरी आरती के बारे में
‘जय अम्बे गौरी’ माँ दुर्गा की सबसे प्रचलित हिंदी आरती है। उत्तर और पश्चिम भारत में नवरात्रि, माता की चौकी, जगराते और हर देवी पूजा का समापन इसी आरती से होता है। इसमें माँ के रूप का वर्णन है — माँग में सिंदूर, कस्तूरी का टीका, लाल वस्त्र, सिंह की सवारी, हाथों में खड्ग और खप्पर — और उनके पराक्रम का: शुम्भ-निशुम्भ, महिषासुर, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज और मधु-कैटभ का संहार।
आरती के अंतिम पद में रचनाकार का नाम आता है — ‘कहत शिवानंद स्वामी’ — इसलिए यह शिवानंद स्वामी की रचना मानी जाती है; उनके बारे में इससे अधिक प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती। टेक ‘जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी’ में माँ को ‘गौरी’ (गोरे रूप वाली) और ‘श्यामा’ (साँवले रूप वाली) दोनों कहकर पुकारा गया है।
दुर्गा जी की आरती कैसे करें
- पहले पूजा या दुर्गा चालीसा का पाठ पूरा करें; आरती पूजा के अंत में की जाती है।
- थाली में घी का दीपक या कपूर जलाएँ; साथ में लाल फूल, रोली, अक्षत और प्रसाद रखें।
- पहले पूरी टेक गाएँ, फिर हर पद के बाद ‘ॐ जय अम्बे गौरी’ दोहराते हुए थाली को घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएँ।
- आरती के बाद दीपक की लौ पर दोनों हाथ घुमाकर आँखों से लगाएँ और प्रसाद बाँटें।
आरती की थाली कितनी बार घुमाएँ
परंपरा में प्रचलित क्रम है: देवी के चरणों की ओर चार बार, नाभि की ओर दो बार, मुख की ओर एक बार, और फिर पूरे विग्रह के सामने सात बार आरती घुमाई जाती है। अलग-अलग परिवारों में यह क्रम थोड़ा अलग भी हो सकता है; भाव सबसे महत्वपूर्ण है।
आरती कब करें
रोज़ सुबह-शाम की पूजा के अंत में, और विशेष रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह और शाम दोनों समय। शुक्रवार, अष्टमी, माता की चौकी और जगराते में भी यही आरती गाई जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
‘जय अम्बे गौरी’ आरती किसने लिखी?
आरती के अंतिम पद में नाम आता है: ‘कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै’। इसलिए यह शिवानंद स्वामी की रचना मानी जाती है। उनके जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।
दुर्गा जी की आरती कब करनी चाहिए?
रोज़ सुबह-शाम पूजा के अंत में। नवरात्रि के नौ दिनों में दोनों समय आरती की परंपरा है, और शुक्रवार व अष्टमी को भी विशेष रूप से की जाती है।
आरती की थाली कितनी बार घुमानी चाहिए?
प्रचलित परंपरा के अनुसार चरणों की ओर चार बार, नाभि की ओर दो बार, मुख की ओर एक बार, और फिर पूरे विग्रह के सामने सात बार।
‘जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी’ का अर्थ क्या है?
‘अम्बे’ का अर्थ है माँ। ‘गौरी’ माँ का गोरा, सौम्य रूप है और ‘श्यामा’ साँवला रूप। टेक कहती है कि हरि, ब्रह्मा और शिव भी रात-दिन उनका ध्यान करते हैं।
हर पद के बाद ‘ॐ जय अम्बे गौरी’ क्यों लिखा है?
आरती ऐसे ही गाई जाती है: शुरू में पूरी टेक, और हर पद के बाद ‘ॐ जय अम्बे गौरी’। कई लोग हर पद के बाद पूरी टेक भी दोहराते हैं; दोनों तरह से गाना ठीक है।
कुछ जगह यह आरती छोटी क्यों मिलती है?
कुछ संग्रहों में चण्ड-मुण्ड, ब्रह्माणी और ‘तुम ही जग की माता’ वाले पद नहीं होते। अधिकतर स्रोतों में बारह पद हैं, इसलिए यहाँ पूरी आरती दी गई है।
दुर्गा आरती के बाद कौन सा मंत्र बोलते हैं?
कई परिवार आरती के बाद दुर्गा सप्तशती का श्लोक ‘सर्वमंगल मांगल्ये…’ बोलते हैं और फिर क्षमा-प्रार्थना करते हैं। यह परंपरा हर घर में अलग हो सकती है।
क्या दुर्गा चालीसा के बाद आरती करनी चाहिए?
हाँ, परंपरा में पाठ का समापन आरती से होता है। पहले दुर्गा चालीसा पढ़ें, फिर यह आरती गाएँ।
मराठी की ‘दुर्गे दुर्घट भारी’ आरती क्या यही है?
नहीं। ‘दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी’ मराठी की अलग आरती है। यह पृष्ठ हिंदी आरती ‘जय अम्बे गौरी’ का है, जिसे आप मराठी पृष्ठ पर देवनागरी में पढ़ सकते हैं।
क्या यह आरती English या दूसरी लिपि में पढ़ सकते हैं?
हाँ। भाषा सूची में English, मराठी, गुजराती, বাংলা या ଓଡ଼ିଆ चुनें। शब्द वही रहते हैं, केवल लिपि बदलती है।
यह पाठ कई प्रकाशित स्रोतों से शब्दशः मिलाकर जाँचा गया है। कोई त्रुटि दिखे तो हमें बताएँ।