मुख्य मजकुराकडे जा
आरती घर

दुर्गा आरती — जय अंबे गौरी

Shri Durga Ji Ki Aarti · Shivanand Swami

‘जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी’ — उत्तर भारतात सर्वाधिक गायली जाणारी माँ दुर्गेची हिंदी आरती. (मराठी आरती ‘दुर्गे दुर्घट भारी’ ही वेगळी आहे.) खाली संपूर्ण आरती मोठ्या, स्पष्ट अक्षरांत दिली आहे.

आरती

  1. जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

  2. 1

    माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

  3. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  4. 2

    कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

  5. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  6. 3

    केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

  7. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  8. 4

    कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥

  9. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  10. 5

    शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥

  11. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  12. 6

    चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

  13. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  14. 7

    ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।आगम-निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

  15. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  16. 8

    चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

  17. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  18. 9

    तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥

  19. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  20. 10

    भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥

  21. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  22. 11

    कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

  23. ॐ जय अम्बे गौरी॥

  24. 12

    श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥

  25. ॐ जय अम्बे गौरी॥

सविस्तर माहिती (हिंदीत) →

हा पाठ अनेक प्रकाशित स्रोतांशी शब्दशः जुळवून तपासला आहे. काही चूक दिसल्यास आम्हाला कळवा.